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🩺 सेहत · जन्म से 1 साल तक

🤮 एसिड रिफ्लक्स या बस नॉर्मल दूध पलटना?

सारे बच्चे थोड़ा-बहुत दूध बाहर निकालते (spit up करते) हैं: उनके पेट का ऊपरी वॉल्व अभी पूरी तरह सेट नहीं हुआ होता। तुम्हें बस एक आराम से दूध निकालने वाले 'हैप्पी स्पिटर' और असली एसिड रिफ्लक्स में फर्क समझना है: रिफ्लक्स में एसिड उनकी खाने की नली को जलाता है और काफी दर्द देता है।

दोनों में फर्क पहचानो

  • नॉर्मल स्पिट-अप: फीड के बाद बिना किसी ज़ोर के थोड़ा दूध बाहर आ जाता है, बच्चा रोता नहीं है, वज़न सही बढ़ रहा है और वह मजे में मुस्कुराता रहता है। नुकसान सिर्फ तुम्हारी टी-शर्ट का होता है।
  • एसिड रिफ्लक्स (GERD): फीड के दौरान या बाद में बच्चा बुरी तरह रोता है, अपनी पीठ को पीछे की तरफ अकड़ाता (arch करता) है, बीच-बीच में कुछ चबाने जैसा मुंह बनाता है, सीधा लेटना बिल्कुल पसंद नहीं करता और नींद में परेशान रहता है।
  • साइलेंट रिफ्लक्स: बच्चा दूध बाहर नहीं फेंकता, लेकिन तुम्हें लिक्विड के गले तक ऊपर आने की आवाज़ सुनाई देती है और वह दर्द से चेहरा बनाते हुए या रोते हुए उसे वापस निगल जाता है।

रिफ्लक्स से निपटने के तरीके

  1. 1. सीधा (अपराइट) रखो

    हर फीड के बाद बच्चे को 20 से 30 मिनट तक अपनी छाती से सटाकर या स्लिंग में बिल्कुल सीधा रखो।

  2. 2. बीच-बीच में डकार दिलाओ

    फीडिंग के बीच में थोड़ा रुक-रुक कर डकार दिलाते रहो, ताकि अंदर फंसी हवा बाहर निकल जाए और बाद में दूध का फव्वारा न बने।

  3. 3. पेट पर कुछ भी टाइट न हो

    डायपर को कमर के पास थोड़ा ढीला रखो और टाइट इलास्टिक वाले पैंट या लोअर बिल्कुल मत पहनाओ।

  4. 4. गद्दा उठाना: सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर

    बेडशीट के नीचे 15° का प्रमाणित वेज (wedge) सिर्फ तभी इस्तेमाल करो जब डॉक्टर कहे। तकिए या तौलिए मोड़कर खुद से कोई जुगाड़ मत लगाना।

  5. 5. डॉक्टर को कब दिखाएं

    अगर बच्चे का वज़न बढ़ना रुक जाए, वह दूध पीने से मना कर दे, या उल्टी में खून दिखे, तो फौरन डॉक्टर को दिखाओ। वे कोई थिकन्ड फॉर्मूला या दवा सुझा सकते हैं।

  6. 6. डैड हैक

    बेबी कैरियर रिफ्लक्स के खिलाफ तुम्हारा सबसे बेहतरीन हथियार है: दूध पीने के बाद यह बच्चे को एकदम सीधा रखता है, तुम्हारी बॉडी की गर्माहट उसके पेट को आराम देती है, और तुम्हारे दोनों हाथ भी फ्री रहते हैं।

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यह गाइड डॉक्टरी सलाह की जगह नहीं ले सकती। किसी भी शक या परेशानी में अपने डॉक्टर से बात करें या इमरजेंसी में 112 (एम्बुलेंस 108) पर कॉल करें।